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चीन और पाकिस्तान के बीच नया सीमा समझौता, भारत ने क्यों किया खारिज? जानिए पूरा विवाद

चीन और पाकिस्तान के बीच सीमा से जुड़े एक नए संयुक्त आयोग को लेकर भारत ने कड़ी आपत्ति जताई है। भारत ने पाकिस्तान-चीन सीमा संयुक्त आयोग को कानूनी आधार से रहित बताते हुए खारिज कर दिया है। भारत का कहना है कि पाकिस्तान को उस क्षेत्र के संबंध में चीन के साथ किसी तरह की व्यवस्था करने का अधिकार नहीं है, जिस पर भारत पाकिस्तान के अवैध कब्जे वाला क्षेत्र मानता है।

यह मामला खास तौर पर शक्सगाम घाटी और पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) से जुड़े क्षेत्र को लेकर है। चीन और पाकिस्तान के बीच इस इलाके को लेकर पहले भी समझौता हो चुका है, लेकिन भारत ने उसे कभी मान्यता नहीं दी।

क्या हुआ है चीन और पाकिस्तान के बीच?

पाकिस्तान और चीन ने हाल में पाकिस्तान-चीन सीमा संयुक्त आयोग को लेकर समझौते को आगे बढ़ाया है। पाकिस्तान ने इसे सीमा प्रबंधन, व्यापार और दोनों देशों के बीच संपर्क बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया है।

यह आयोग पाकिस्तान-चीन सीमा से जुड़े मामलों में सहयोग का ढांचा तैयार करने से संबंधित है। इसमें सीमा प्रबंधन और सीमा क्षेत्र में आवाजाही जैसे मुद्दे शामिल हैं।

बीबीसी की रिपोर्ट के मुताबिक, यह व्यवस्था पूरी तरह नई नहीं है। इसकी जड़ें 1963 के चीन-पाकिस्तान सीमा समझौते में हैं और अब संयुक्त आयोग के प्रावधान को सक्रिय करने की दिशा में कदम उठाया गया है।

भारत ने इसे क्यों खारिज किया?

भारत का मुख्य विरोध इस बात को लेकर है कि पाकिस्तान जिस इलाके को चीन के साथ सीमा व्यवस्था में शामिल कर रहा है, भारत उसे अपने क्षेत्र का हिस्सा मानता है।

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि भारत पाकिस्तान-चीन सीमा संयुक्त आयोग को स्वीकार नहीं करता और इसका कोई कानूनी आधार नहीं है। भारत का कहना है कि जम्मू-कश्मीर और लद्दाख भारत का अभिन्न हिस्सा हैं और पाकिस्तान को भारत के क्षेत्र से संबंधित किसी तीसरे देश के साथ समझौता करने का अधिकार नहीं है।

भारत ने यह भी दोहराया है कि वह 1963 के चीन-पाकिस्तान सीमा समझौते को अवैध और अमान्य मानता है।

क्या है 1963 का चीन-पाकिस्तान समझौता?

1963 में पाकिस्तान और चीन के बीच एक सीमा समझौता हुआ था। इसके तहत पाकिस्तान ने करीब 5,180 वर्ग किलोमीटर के शक्सगाम घाटी क्षेत्र को चीन को सौंपने पर सहमति जताई थी।

भारत का कहना है कि यह क्षेत्र तत्कालीन जम्मू-कश्मीर रियासत का हिस्सा था और पाकिस्तान ने पहले इस पर कब्जा किया था। इसलिए भारत के मुताबिक पाकिस्तान को इस क्षेत्र को चीन को सौंपने का अधिकार ही नहीं था।

दूसरी ओर, पाकिस्तान इस समझौते को वैध मानता है और जम्मू-कश्मीर को विवादित क्षेत्र बताता रहा है। यही दोनों देशों के बीच इस मामले का मूल विवाद है।

शक्सगाम घाटी क्यों महत्वपूर्ण है?

शक्सगाम घाटी काराकोरम क्षेत्र में स्थित एक पहाड़ी इलाका है। यह क्षेत्र रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माना जाता है क्योंकि यह चीन के शिनजियांग क्षेत्र और पाकिस्तान के गिलगित-बाल्टिस्तान के बीच संपर्क क्षेत्र से जुड़ा है।

इसी व्यापक इलाके में चीन और पाकिस्तान के बीच काराकोरम हाईवे और चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारा यानी CPEC जैसी परियोजनाएं भी मौजूद हैं।

भारत लंबे समय से CPEC का भी विरोध करता रहा है क्योंकि इसका एक हिस्सा उस क्षेत्र से होकर गुजरता है जिसे भारत पाकिस्तान के कब्जे वाला अपना क्षेत्र मानता है।

चीन और पाकिस्तान के लिए इसका क्या मतलब है?

इस व्यवस्था को चीन और पाकिस्तान के बीच सीमा क्षेत्र में व्यावहारिक सहयोग बढ़ाने के कदम के तौर पर देखा जा रहा है।

बीबीसी से बातचीत में अंतरराष्ट्रीय संबंधों के विशेषज्ञ जबिन टी. जैकब ने कहा कि यह पूरी तरह नई सीमा व्यवस्था से ज्यादा 1963 के समझौते में मौजूद संयुक्त आयोग के प्रावधान को सक्रिय करने जैसा है। उनके मुताबिक इसमें सीमा प्रबंधन और संपर्क व्यवस्था को संस्थागत रूप देने की कोशिश दिखाई देती है।

पाकिस्तान के पूर्व राजदूत हुसैन हक्कानी ने इसे सीमा सहयोग, अवैध घुसपैठ रोकने और CPEC से जुड़े रणनीतिक ढांचे की सुरक्षा के लिहाज से महत्वपूर्ण बताया है। यह उनका आकलन है, न कि भारत की आधिकारिक स्थिति।

क्या इसका भारत-चीन सीमा पर तुरंत असर पड़ेगा?

विशेषज्ञों के मुताबिक, इस कदम का भारत-चीन वास्तविक नियंत्रण रेखा यानी LAC पर तत्काल सैन्य प्रभाव दिखाई देना जरूरी नहीं है।

बीबीसी से बातचीत में जबिन टी. जैकब ने कहा कि फिलहाल LAC पर इसका कोई तत्काल या स्पष्ट प्रभाव नजर नहीं आता। हालांकि, यह कदम उस इलाके में चीन-पाकिस्तान सहयोग को संस्थागत रूप देने के लिहाज से महत्वपूर्ण है, जिस पर भारत अपना दावा करता है।

भारत और चीन के बीच LAC को लेकर लंबे समय से विवाद और सैन्य तनाव रहा है। ऐसे में चीन और पाकिस्तान के बीच सीमा क्षेत्र में बढ़ता सहयोग भारत के लिए रणनीतिक महत्व रखता है।

भारत का रुख क्या है?

भारत का कहना है कि उसकी स्थिति स्पष्ट और लगातार एक जैसी रही है। नई दिल्ली के मुताबिक पाकिस्तान के पास भारत के क्षेत्र को लेकर किसी अन्य देश के साथ समझौता करने का अधिकार नहीं है।

विदेश मंत्रालय ने यह भी कहा है कि भारत अपनी संप्रभुता और क्षेत्रीय दावों से जुड़े मामलों में ऐसे किसी कदम को स्वीकार नहीं करता।

यानी भारत की आपत्ति सिर्फ नए संयुक्त आयोग तक सीमित नहीं है, बल्कि इसकी ऐतिहासिक पृष्ठभूमि 1963 के चीन-पाकिस्तान सीमा समझौते तक जाती है।

विवाद की जड़ क्या है?

पूरे मामले को आसान भाषा में समझें तो विवाद तीन स्तरों पर है—

पहला, भारत शक्सगाम घाटी और इससे जुड़े क्षेत्र को अपने क्षेत्र का हिस्सा मानता है।

दूसरा, पाकिस्तान का कहना है कि जम्मू-कश्मीर का अंतिम दर्जा विवादित है और वह 1963 में चीन के साथ हुए समझौते को वैध मानता है।

तीसरा, चीन पाकिस्तान के साथ किए गए अपने सीमा समझौते और वहां मौजूद व्यवस्थाओं को आगे बढ़ा रहा है।

इसी वजह से चीन-पाकिस्तान के बीच सीमा सहयोग का कोई भी नया कदम भारत की नजर में केवल दो देशों के बीच का सामान्य सीमा समझौता नहीं रहता, बल्कि इसका संबंध भारत के क्षेत्रीय दावे से भी जुड़ जाता है।

 

 

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