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Diwali 2021 Pujan Muhurat: ये है गणेश-लक्ष्मी पूजन का शुभ मुहूर्त, नोट कर लें संपूर्ण पूजन विधि व सामग्री लिस्ट

दीपोत्सव यानी दीपावली का पर्व हर साल कार्तिक मास में कृष्ण पक्ष की अमावस्या तिथि को मनाया जाता है। इस दीवाली 4 नवंबर, गुरुवार यानी आज मनाई जा रही है। इस दिन मां लक्ष्मी और भगवान गणेश की विधिवत पूजा-अर्चना की जाती है। शास्त्रों में दिवाली की रात सर्वार्थ सिद्धि की रात मानी जाता है। मान्यता है कि दिवाली की रात माता लक्ष्मी घर-घर जाकर भक्तों पर अपनी कृपा बरसाती हैं। दिवाली पर अगर आप भी मां लक्ष्मी को प्रसन्न कर उनका आशीर्वाद प्राप्त करना चाहते हैं तो जानिए गणेश-लक्ष्मी पूजन का शुभ मुहूर्त, पूजन विधि और सामग्री लिस्ट-

दिवाली की पूजा विधि, शुभ मुहूर्त और पूजा सामग्री (Diwali Puja Vidhi, Subh Muhurat and Puja Samagri List)-

दीपावली पूजन के शुभ मुहूर्त- श्री गुरू ज्योतिष शोध संस्थान के अध्यक्ष पं. हृदय रंजन शर्मा के अनुसार, दिवाली पर पूजन का सर्वश्रेष्ठ समय धनु और मकर लग्न में सुबह 09:49 से 01:37 तक है। इसके बाद शाम के समय पूजन का समय 5:33 बजे से 06:10 बजे तक, मिथुन लग्न में रात्रि में पूजन का समय 8:03 बजे से रात्रि 10:17 बजे तक और सिंह लग्न में पूजन का समय रात्रि में 10:33 बजे से 1:30 बजे तक रहेगा।

दिवाली पूजन सामग्री लिस्ट-

मां लक्ष्मी की प्रतिमा (कमल के पुष्प पर बैठी हुईं), गणेश जी की तस्वीर या प्रतिमा (गणपति जी की सूंड बांयी ओर होनी चाहिए), कमल का फूल, गुलाब का फूल, पान के पत्ते, रोली, सिंदूर, केसर, अक्षत (साबुत चावल), पूजा की सुपारी, फल, फूल मिष्ठान, दूध, दही, शहद, इत्र, गंगाजल, कलावा, धान का लावा(खील) बताशे, लक्ष्मी जी के समक्ष जलाने के लिए पीतल का दीपक, मिट्टी के दीपक, तेल, शुद्ध घी और रुई की बत्तियां, तांबे या पीतल का कलश, एक पानी वाला नारियल, चांदी के लक्ष्मी गणेश स्वरुप के सिक्के, साफ आटा, लाल या पीले रंग का कपड़ा आसन के लिए, चौकी और पूजा के लिए थाली।

मां लक्ष्मी-गणेश पूजन विधि-

सबसे पहले पूजा का संकल्प लें।

श्रीगणेश, लक्ष्मी, सरस्वती जी के साथ कुबेर जी के सामने एक-एक करके सामग्री अर्पित करें।

इसके बाद देवी-देवताओं के सामने घी के दीए प्रवज्जलित करें।

ऊं श्रीं श्रीं हूं नम: का 11 बार या एक माला का जाप करें।

एकाक्षी नारियल या 11 कमलगट्टे पूजा स्थल पर रखें।

श्री यंत्र की पूजा करें और उत्तर दिशा में प्रतिष्ठापित करें।

देवी सूक्तम का पाठ करें।

 

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