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40 हजार फीस के बाद भी खाने में कीड़े और बाल मिलने का आरोप, कैलाश हॉस्टल की छात्राओं का प्रदर्शन

लखनऊ: लखनऊ विश्वविद्यालय के कैलाश गर्ल्स हॉस्टल में मेस के खाने की गुणवत्ता को लेकर छात्राओं ने विरोध प्रदर्शन किया। छात्राओं ने आरोप लगाया कि करीब 40 हजार रुपये फीस देने के बावजूद उन्हें साफ और गुणवत्तापूर्ण भोजन नहीं मिल रहा है। छात्राओं के मुताबिक, कई बार खाने में बाल और कीड़े मिलने की शिकायत सामने आई है। इसके अलावा बर्तन ठीक से साफ नहीं किए जाने और रसोई में गंदगी जमा रहने का भी आरोप लगाया गया।

खाने की गुणवत्ता को लेकर छात्राओं में नाराजगी

कैलाश गर्ल्स हॉस्टल की छात्राओं का कहना है कि मेस में मिलने वाले भोजन की गुणवत्ता लंबे समय से चिंता का विषय बनी हुई है। छात्राओं ने आरोप लगाया कि खाने में कभी बाल तो कभी कीड़े मिलने की शिकायत सामने आई।

इसके अलावा छात्राओं ने मेस के बर्तनों की सफाई को लेकर भी सवाल उठाए। उनका आरोप है कि कई बार ठीक से साफ नहीं किए गए बर्तनों में खाना परोसा जाता है। रसोई परिसर में कचरा जमा रहने की शिकायत भी छात्राओं ने की।

शिकायत लेकर अधिकारियों के पास पहुंचीं छात्राएं

मेस की व्यवस्था को लेकर छात्राएं पहले विश्वविद्यालय के अधिकारियों के पास अपनी शिकायत लेकर पहुंचीं। रिपोर्ट के मुताबिक, छात्राएं छात्र कल्याण अधिष्ठाता प्रो. अमिता कनौजिया से मिलने गईं।

इसके बाद नाराज छात्राएं कुलपति कार्यालय पहुंच गईं। मामले की जानकारी मिलने पर चीफ प्रॉक्टर प्रो. राकेश द्विवेदी, चीफ प्रोवोस्ट प्रो. आशीष अवस्थी और अन्य अधिकारी मौके पर पहुंचे। इसके बाद छात्राओं की कुलपति से मुलाकात कराई गई।

दूसरे हॉस्टल के छात्रों ने भी किया था प्रदर्शन

मेस की व्यवस्था को लेकर सिर्फ कैलाश हॉस्टल में ही शिकायतें सामने नहीं आईं। इससे पहले हबीबुल्लाह हॉस्टल के छात्रों ने भी सेंट्रल मेस की खाद्य सामग्री और भोजन की गुणवत्ता को लेकर प्रदर्शन किया था।

छात्रों ने सब्जियों, मटर और अन्य खाद्य सामग्री की गुणवत्ता पर सवाल उठाए थे। कुछ छात्रों ने मेस में रखी सामग्री को बाहर भी फेंक दिया था। अधिकारियों से बातचीत के बाद छात्रों की मांगों को लिखित रूप से स्वीकार किया गया और आठ सदस्यीय मेस कमेटी गठित की गई, जिसमें छात्र भी शामिल हैं।

विश्वविद्यालय प्रशासन ने उठाए कदम

मामले के बाद विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से मेस व्यवस्था में सुधार के निर्देश दिए गए। रिपोर्ट के मुताबिक, कुलपति प्रो. जेपी सैनी ने कैलाश गर्ल्स हॉस्टल का औचक निरीक्षण भी किया और छात्राओं से सीधे उनकी समस्याएं जानीं।

निरीक्षण के दौरान मेस के खाने, पीने के पानी, वॉशरूम की सफाई, बिजली के उपकरण, वाई-फाई और सुरक्षा से जुड़ी शिकायतें सामने आईं। कुलपति ने हॉस्टल में जरूरी मरम्मत जल्द कराने और मेस की निगरानी बढ़ाने के निर्देश दिए।

मेस के कर्मचारियों को बदलने के निर्देश

विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से मेस में खाना बनाने वाले कर्मचारियों को बदलने का निर्देश भी जारी किया गया। साथ ही छात्राओं को पौष्टिक और गुणवत्तापूर्ण भोजन उपलब्ध कराने तथा नाश्ता देने की व्यवस्था पर जोर दिया गया।

खाना वितरण के लिए दो महिला कर्मचारियों को लगाए जाने की बात भी सामने आई है। इसके अलावा हॉस्टल की सफाई व्यवस्था को बेहतर करने के निर्देश दिए गए।

पानी की व्यवस्था को लेकर भी शिकायत

छात्राओं ने सिर्फ भोजन ही नहीं, बल्कि पीने के पानी की व्यवस्था को लेकर भी शिकायत की। इसके बाद विश्वविद्यालय प्रशासन ने हॉस्टल में अतिरिक्त आरओ सिस्टम लगाने के निर्देश दिए।

रिपोर्ट के मुताबिक, पहले से मौजूद आरओ सिस्टम के अलावा चार और आरओ सिस्टम लगाने की प्रक्रिया शुरू करने के निर्देश दिए गए हैं।

शिकायतों की जांच के लिए बनाई गई कमेटी

लखनऊ विश्वविद्यालय ने छात्राओं की शिकायतों की जांच और हॉस्टल की मेस व्यवस्था की निगरानी के लिए 10 सदस्यीय समिति गठित की है।

विश्वविद्यालय के प्रवक्ता के अनुसार, समिति को सभी हॉस्टलों की मेस का समय-समय पर निरीक्षण करने और हर सप्ताह कुलपति को रिपोर्ट देने का निर्देश दिया गया है। रिपोर्ट में जरूरी सुधार के सुझाव भी शामिल किए जाएंगे।

कांग्रेस ने भी उठाया मामला

मामले को लेकर उत्तर प्रदेश कांग्रेस ने भी प्रतिक्रिया दी और विश्वविद्यालय की मेस व्यवस्था पर सवाल उठाए। कांग्रेस ने छात्राओं की शिकायतों के आधार पर सरकार पर निशाना साधा। हालांकि, कांग्रेस की ओर से लगाए गए राजनीतिक आरोपों को स्वतंत्र रूप से प्रमाणित तथ्य के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए।

अब छात्राओं की मांग पर कार्रवाई का इंतजार

छात्राओं की मुख्य मांग मेस में साफ-सफाई और गुणवत्तापूर्ण भोजन की व्यवस्था सुनिश्चित करना है। विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से अब मेस की निगरानी, कर्मचारियों में बदलाव, पानी की व्यवस्था और शिकायतों की जांच के लिए कदम उठाए गए हैं।

अब देखना होगा कि इन निर्देशों के बाद हॉस्टल की मेस व्यवस्था में कितना सुधार होता है और छात्राओं की शिकायतों का स्थायी समाधान किस तरह किया जाता है।

 

 

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