उत्तर प्रदेश में मानसून की विदाई से पहले एक बार फिर मौसम ने करवट ली है। बंगाल की खाड़ी में बने गहन अवदाब के असर से प्रदेश के कई हिस्सों में बारिश की गतिविधियां तेज हो गई हैं। मौसम विभाग के अनुसार, लखनऊ समेत करीब 35 जिलों में अगले 48 घंटे के दौरान मध्यम से भारी बारिश हो सकती है। पूर्वी उत्तर प्रदेश में 25 और 26 सितंबर को कई जगह भारी से बहुत भारी बारिश की चेतावनी जारी की गई है।
राजधानी लखनऊ में 25 और 26 सितंबर को भारी बारिश के साथ गरज-चमक और तेज हवाएं चलने का पूर्वानुमान है। मौसम विभाग के अनुसार हवाओं की रफ्तार करीब 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंच सकती है। इससे कई इलाकों में जलभराव और यातायात प्रभावित होने की स्थिति बन सकती है।
मौसम विभाग के मुताबिक बारिश का सबसे ज्यादा असर पूर्वी उत्तर प्रदेश में देखने को मिल सकता है। 25 सितंबर को पूर्वी यूपी में बहुत भारी बारिश, जबकि 26 सितंबर को भी बहुत भारी बारिश के साथ गरज-चमक और तेज हवाओं की चेतावनी है। 27 सितंबर को भी भारी बारिश का दौर जारी रहने की संभावना है।
शनिवार को बांदा, चित्रकूट, कौशांबी, फतेहपुर, प्रतापगढ़, गोंडा, बलरामपुर, श्रावस्ती, बाराबंकी, रायबरेली, अमेठी, सुल्तानपुर और अयोध्या समेत आसपास के इलाकों में बहुत भारी बारिश के आसार जताए गए हैं। पूर्वी उत्तर प्रदेश के लगभग सभी जिलों में भी बारिश का दौर जारी रहने की संभावना है।
शुरुआत में बारिश का प्रभाव पूर्वी और मध्य यूपी में अधिक रहने की संभावना है, लेकिन इसके बाद पश्चिमी उत्तर प्रदेश के कई जिलों में भी बारिश की गतिविधियां बढ़ सकती हैं। मौसम विभाग के अनुसार 25 से 27 सितंबर तक पूर्वी और पश्चिमी दोनों हिस्सों में बारिश के साथ गरज-चमक और तेज हवाओं का असर देखने को मिल सकता है।
बारिश और बादलों के कारण प्रदेश के कई हिस्सों में दिन के तापमान में 4 से 8 डिग्री सेल्सियस तक गिरावट आने की संभावना जताई गई है। लखनऊ में भी तापमान सामान्य से नीचे रहने का अनुमान है।
मानसून की विदाई की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है, लेकिन मौजूदा मौसम प्रणाली के कारण बारिश का दौर कुछ और दिन जारी रह सकता है। जागरण के मुताबिक 28-29 सितंबर तक कहीं-कहीं बारिश की संभावना बनी हुई है और अक्टूबर की शुरुआत तक रुक-रुककर बारिश देखने को मिल सकती है।
भारी बारिश, बिजली गिरने और तेज हवाओं की संभावना को देखते हुए लोगों को मौसम विभाग की चेतावनियों पर ध्यान देने की सलाह दी जाती है। खासकर खुले स्थानों पर रहने और आंधी-तूफान के दौरान पेड़ों या कमजोर संरचनाओं के नीचे खड़े होने से बचना जरूरी है।