नागालैंड के राज्यपाल नंद किशोर यादव ने हिंदी को बढ़ावा देने के साथ-साथ राज्य की स्थानीय और आदिवासी भाषाओं के संरक्षण पर जोर दिया है। उन्होंने कहा कि भारत की भाषाई विविधता देश की बड़ी सांस्कृतिक ताकतों में से एक है और हिंदी तथा स्थानीय भाषाएं एक-दूसरे के साथ आगे बढ़ सकती हैं।
राज्यपाल नंद किशोर यादव ने कहा कि हिंदी देश के अलग-अलग भाषाई क्षेत्रों के लोगों के बीच संवाद का एक महत्वपूर्ण माध्यम है। हिंदी सीखने से लोग देश के दूसरे हिस्सों में रहने वाले लोगों के साथ आसानी से संवाद कर सकते हैं।
वहीं, उन्होंने यह भी कहा कि स्थानीय भाषाएं किसी समुदाय को उसकी जड़ों, इतिहास और सांस्कृतिक पहचान से जोड़ती हैं। उनके मुताबिक दोनों की अपनी अलग भूमिका है।
राज्यपाल ने नागालैंड की भाषाई और सांस्कृतिक विविधता का उल्लेख करते हुए कहा कि राज्य में अलग-अलग जनजातियां, भाषाएं, बोलियां और परंपराएं मौजूद हैं। हर भाषा के साथ किसी समुदाय का इतिहास, पारंपरिक ज्ञान, मूल्य, गीत और कहानियां जुड़ी हुई हैं।
उन्होंने कहा कि हिंदी को बढ़ावा देते समय स्थानीय समुदायों की भाषाओं के प्रति भी समान सम्मान और संवेदनशीलता रखी जानी चाहिए।
राज्यपाल यह बात 24 सितंबर 2026 को कोहिमा में आयोजित हिंदी फिल्म सॉन्ग प्रतियोगिता के पुरस्कार वितरण समारोह में कह रहे थे। यह कार्यक्रम आकाशवाणी कोहिमा की ओर से हिंदी पखवाड़ा 2026 के तहत आयोजित किया गया था।
उन्होंने प्रतियोगिता में शामिल प्रतिभागियों और विजेताओं को बधाई देते हुए कहा कि संगीत भाषाई सीमाओं को पार कर लोगों को जोड़ने का काम करता है। हिंदी फिल्मी गीतों ने कई पीढ़ियों की साझा सांस्कृतिक स्मृति में भी जगह बनाई है।
नंद किशोर यादव ने युवाओं से एक से ज्यादा भाषाएं सीखने की अपील की। उन्होंने कहा कि युवाओं को हिंदी के साथ-साथ स्थानीय और दूसरी भारतीय भाषाओं को भी समझने का प्रयास करना चाहिए।
उन्होंने स्थानीय भाषाओं में मौजूद पारंपरिक ज्ञान और सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित करने की जरूरत पर भी जोर दिया।
राज्यपाल ने सरकारी कामकाज में स्पष्ट और आसानी से समझ आने वाली भाषा के इस्तेमाल की जरूरत बताई। उन्होंने कहा कि आधिकारिक संवाद सरल, सुलभ, स्पष्ट और लोगों के लिए समझने योग्य होना चाहिए।
उनके अनुसार, सरकारी कामकाज में हिंदी के प्रगतिशील इस्तेमाल का उद्देश्य बेहतर संवाद और बेहतर सार्वजनिक सेवा में योगदान देना होना चाहिए। साथ ही सार्वजनिक संस्थानों को भारत की बहुभाषी प्रकृति के प्रति संवेदनशील रहना चाहिए।
राज्यपाल ने नागालैंड में आकाशवाणी कोहिमा की भूमिका की भी सराहना की। उन्होंने कहा कि भौगोलिक रूप से चुनौतीपूर्ण राज्य में आकाशवाणी स्थानीय आवाजों, भाषाओं, संगीत और परंपराओं को मंच देने के साथ देश के दूसरे हिस्सों से जोड़ने का काम करती है।
उन्होंने यह भी कहा कि डिजिटल प्लेटफॉर्म और सोशल मीडिया के दौर में लोगों के संवाद करने का तरीका बदल गया है, लेकिन लोगों तक सूचना, शिक्षा और सार्वजनिक संदेश पहुंचाने में प्रसारण माध्यमों की भूमिका अभी भी महत्वपूर्ण है।
अपने संबोधन के अंत में राज्यपाल ने भाषाई विविधता को राष्ट्रीय एकता के साथ जोड़ते हुए कहा कि भारत में अलग-अलग भाषाएं और संस्कृतियां एक-दूसरे को कम करने के बजाय साथ-साथ रहकर देश की व्यापक सांस्कृतिक पहचान को मजबूत कर सकती हैं।