केंद्रीय मंत्री और लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के नेता चिराग पासवान ने मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार को लेकर चल रहे विवाद पर अपनी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि अगर चुनाव प्रक्रिया को लेकर लोगों के मन में सवाल उठ रहे हैं, तो चुनाव आयोग की जिम्मेदारी है कि वह अपना पक्ष मजबूती से सामने रखे और जनता का भरोसा बनाए रखे।
चिराग पासवान की यह टिप्पणी ऐसे समय आई है, जब विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने CEC ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग की है। यह विवाद चुनाव आयोग के भीतर कथित मतभेदों और वोटर लिस्ट में बदलाव से जुड़े सवालों के बीच सामने आया है।
चिराग पासवान ने कहा कि अगर चुनाव आयोग के खिलाफ सवाल उठाए जा रहे हैं, तो आयोग और खास तौर पर मुख्य चुनाव आयुक्त की जिम्मेदारी है कि वह मजबूती से अपना पक्ष जनता के सामने रखें।
उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि चुनाव प्रक्रिया को लेकर लोगों के मन में किसी तरह का संदेह पैदा न हो। चिराग ने यह भी कहा कि विपक्ष का सवाल उठाना राजनीति का हिस्सा है, लेकिन चुनाव आयोग की जिम्मेदारी जनता का विश्वास बनाए रखना है।
इससे पहले कांग्रेस नेता और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग की थी।
राहुल गांधी ने चुनाव प्रक्रिया और मतदाता सूची से जुड़े मुद्दों को लेकर चुनाव आयोग पर गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि चुनावी प्रक्रिया में गड़बड़ियां हुई हैं और CEC को इसकी जिम्मेदारी लेनी चाहिए।
राहुल गांधी ने चुनाव आयोग के भीतर कथित मतभेदों से जुड़ी रिपोर्ट का भी हवाला दिया। उन्होंने कहा कि चुनाव प्रक्रिया को लेकर उठ रहे सवालों का जवाब मिलना जरूरी है।
पूरे विवाद की पृष्ठभूमि में द इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट है, जिसमें दावा किया गया कि चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले करीब 10 महीनों में कई फैसलों और प्रक्रियाओं पर आपत्तियां दर्ज की थीं।
रिपोर्ट के मुताबिक, दोनों चुनाव आयुक्तों ने कथित तौर पर कम से कम 14 मौकों पर कुछ फैसलों को लेकर सवाल उठाए। इनमें मतदाता सूची में नए मतदाताओं को शामिल करने और चुनावी प्रक्रिया से जुड़े कुछ बदलाव भी बताए गए हैं।
हालांकि, इन रिपोर्टों के बाद चुनाव आयोग ने अलग रुख सामने रखा।
चुनाव आयोग ने कहा कि उसके सदस्यों के बीच आंतरिक नोट, टिप्पणियां और अलग-अलग विचार होना संस्थागत प्रक्रिया का सामान्य हिस्सा है।
आयोग के मुताबिक अंतिम फैसले और जारी किए गए आदेश सर्वसम्मति से लिए गए हैं। आयोग ने यह भी कहा कि आंतरिक विचार-विमर्श को अंतिम निर्णय से अलग करके नहीं देखा जाना चाहिए।
यानी एक तरफ रिपोर्ट में चुनाव आयुक्तों की आपत्तियों का जिक्र है, जबकि चुनाव आयोग का कहना है कि अंतिम निर्णयों में कोई अलगाव नहीं था।
इस पूरे विवाद में Special Intensive Revision यानी SIR भी एक प्रमुख मुद्दा है। SIR के तहत मतदाता सूची की विशेष गहन समीक्षा की जा रही है।
विपक्षी दलों ने इस प्रक्रिया को लेकर सवाल उठाए हैं और इसे रोकने की मांग भी की है। वहीं चुनाव आयोग का कहना है कि मतदाता सूची को अपडेट और सत्यापित करने की प्रक्रिया कानून और निर्धारित नियमों के तहत की जा रही है।
चिराग पासवान ने कहा कि विपक्ष ऐसे मुद्दे उठाता है तो यह राजनीति का हिस्सा है। हालांकि, उन्होंने साथ ही कहा कि चुनाव आयोग को इन सवालों का जवाब देने की जिम्मेदारी से पीछे नहीं हटना चाहिए।
उनके मुताबिक चुनाव प्रक्रिया में लोगों का भरोसा बेहद महत्वपूर्ण है। अगर जनता के मन में चुनाव प्रक्रिया को लेकर संदेह पैदा होता है, तो आयोग को अपने पक्ष और तथ्यों को स्पष्ट तरीके से सामने रखना चाहिए।
राहुल गांधी के आरोपों के बाद बीजेपी ने भी प्रतिक्रिया दी। बीजेपी प्रवक्ता सुधांशु त्रिवेदी ने चुनाव आयोग की प्रक्रिया का बचाव करते हुए कहा कि SIR और चुनाव आयोग के फैसले कानूनी प्रक्रिया के अनुसार लिए जा रहे हैं।
बीजेपी ने रिपोर्ट में चुनाव आयुक्तों के बीच मतभेदों को लेकर किए गए दावों के आधार पर भी सवाल उठाए और कहा कि अंतिम निर्णयों में चुनाव आयोग के सदस्यों की सामूहिक प्रक्रिया को ध्यान में रखना चाहिए।
फिलहाल विवाद मुख्य रूप से तीन मुद्दों के आसपास है—चुनाव आयोग के भीतर कथित आपत्तियां, SIR के जरिए मतदाता सूची में बदलाव और चुनाव प्रक्रिया को लेकर विपक्ष की ओर से उठाए गए सवाल।
चुनाव आयोग अपने फैसलों को सर्वसम्मत और कानूनी प्रक्रिया के अनुरूप बता रहा है, जबकि विपक्ष रिपोर्टों और अपने आरोपों के आधार पर आयोग से जवाबदेही की मांग कर रहा है। ऐसे में आगे आयोग की ओर से दिए जाने वाले स्पष्टीकरण और संबंधित प्रक्रियाओं पर नजर रहेगी।