घर में अचानक किसी की तबीयत बिगड़ जाए तो शुरुआती स्थिति समझना मुश्किल हो सकता है। ऐसे समय में कुछ बेसिक मेडिकल डिवाइस घर पर मौजूद हों तो ब्लड प्रेशर, ब्लड शुगर, ऑक्सीजन और तापमान जैसी जरूरी जानकारी तुरंत मिल सकती है। कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. राजीव अग्रवाल ने ऐसी 7 मेडिकल डिवाइस के बारे में बताया है, जो जरूरत के समय उपयोगी हो सकती हैं। हालांकि, ये उपकरण डॉक्टर की जांच और इलाज का विकल्प नहीं हैं।
घर में एक ऑटोमैटिक अपर-आर्म ब्लड प्रेशर मॉनिटर रखना उपयोगी हो सकता है। इससे सिस्टोलिक और डायस्टोलिक ब्लड प्रेशर के साथ पल्स रेट भी पता चलती है।
खासकर हाई ब्लड प्रेशर या हृदय संबंधी समस्या वाले लोगों के लिए घर पर बीपी की निगरानी मददगार हो सकती है। अगर रीडिंग बहुत ज्यादा आए और साथ में सीने में दर्द, सांस लेने में परेशानी या कमजोरी जैसे लक्षण हों, तो केवल घर की मशीन पर निर्भर रहने के बजाय तुरंत मेडिकल मदद लेनी चाहिए।
अगर परिवार में किसी को डायबिटीज है तो ग्लूकोमीटर काफी काम का उपकरण हो सकता है। इससे कुछ ही समय में ब्लड शुगर की रीडिंग मिल जाती है।
खासकर इंसुलिन या ऐसी दवाएं लेने वाले लोगों के लिए यह महत्वपूर्ण हो सकता है, क्योंकि ब्लड शुगर बहुत कम होना भी इमरजेंसी की स्थिति बन सकता है।
सांस लेने में परेशानी के दौरान पल्स ऑक्सीमीटर खून में ऑक्सीजन सैचुरेशन (SpO₂) और पल्स रेट की जानकारी दे सकता है।
स्वस्थ लोगों में ऑक्सीजन सैचुरेशन आमतौर पर 95 से 100 प्रतिशत के आसपास रहता है, लेकिन कुछ हृदय या फेफड़ों की बीमारियों और ऊंचाई वाले इलाकों में सामान्य स्तर अलग हो सकता है। इसलिए सिर्फ एक रीडिंग देखकर खुद से निष्कर्ष नहीं निकालना चाहिए।
घर में डिजिटल थर्मामीटर रखना भी जरूरी बेसिक तैयारी का हिस्सा हो सकता है। बुखार होने पर शरीर का तापमान पता करने में इससे मदद मिलती है।
तापमान के साथ दूसरे लक्षणों पर भी ध्यान देना चाहिए। अगर लंबे समय तक या बहुत तेज बुखार हो और साथ में सांस लेने में परेशानी, भ्रम या अत्यधिक कमजोरी जैसे लक्षण हों तो डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए।
कुछ स्मार्टवॉच और पोर्टेबल ECG डिवाइस दिल की धड़कन से जुड़ी शुरुआती जानकारी रिकॉर्ड कर सकते हैं। डॉक्टर की सलाह से इनका इस्तेमाल कुछ हृदय रोगियों के लिए उपयोगी हो सकता है।
हालांकि, स्मार्टवॉच या पोर्टेबल ECG अस्पताल में होने वाली पूरी ECG जांच का विकल्प नहीं है। सीने में दर्द, बेहोशी, अचानक कमजोरी या गंभीर सांस की परेशानी जैसे लक्षण हों तो डिवाइस की रीडिंग का इंतजार नहीं करना चाहिए।
ऑक्सीजन कॉन्सन्ट्रेटर या ऑक्सीजन सिलेंडर हर घर के लिए जरूरी नहीं है। कुछ हृदय या फेफड़ों की पुरानी बीमारी वाले मरीजों को डॉक्टर घर पर ऑक्सीजन रखने की सलाह दे सकते हैं।
बिना डॉक्टर की सलाह के ऑक्सीजन शुरू करना सही नहीं है। मरीज को कितनी ऑक्सीजन और कितने फ्लो पर दी जानी है, यह डॉक्टर की सलाह के अनुसार ही तय किया जाना चाहिए।
अस्थमा, COPD या दूसरी सांस संबंधी बीमारियों वाले कुछ मरीजों के लिए नेब्युलाइजर उपयोगी हो सकता है। इसमें डॉक्टर द्वारा बताई गई दवा को महीन धुंध में बदलकर सांस के जरिए दिया जाता है।
लेकिन अगर सांस बहुत ज्यादा फूल रही है या स्थिति तेजी से बिगड़ रही है, तो सिर्फ नेब्युलाइजर का इस्तेमाल करते रहना पर्याप्त नहीं है। ऐसी स्थिति में तुरंत मेडिकल सहायता लेना जरूरी है।
घर में मेडिकल उपकरण रखना तभी उपयोगी है जब परिवार के लोगों को उनका सही इस्तेमाल भी पता हो। इन उपकरणों को इस्तेमाल करने का तरीका पहले से समझ लेना चाहिए। साथ ही जरूरी दवाएं, डॉक्टर के संपर्क नंबर और मेडिकल रिकॉर्ड ऐसी जगह रखने चाहिए जहां इमरजेंसी में आसानी से मिल सकें।
सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि इन उपकरणों से मिली रीडिंग को अंतिम मेडिकल जांच न माना जाए। ये डॉक्टर को शुरुआती जानकारी देने में मदद करते हैं, लेकिन गंभीर लक्षण होने पर समय पर अस्पताल या डॉक्टर तक पहुंचना ज्यादा जरूरी है।