गुरुवार को मामले की सुनवाई के दौरान चंद्रशेखर आजाद अदालत में उपस्थित नहीं हुए। शिकायतकर्ता के वकील भजनलाल गौतम ने अदालत को बताया कि पहले भी उनके खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी हो चुका है, लेकिन वह लगातार सुनवाई में पेश नहीं हो रहे हैं।
शिकायतकर्ता पक्ष ने अदालत से गैर-जमानती वारंट जारी करने के साथ-साथ सीआरपीसी की धारा 82 और 83 के तहत कार्रवाई की मांग की थी। इसके बाद अदालत ने वारंट जारी किया और संपत्ति कुर्क करने से जुड़ी कार्रवाई का आदेश दिया। यह अदालत की प्रक्रिया से जुड़ा आदेश है, न कि मारपीट के आरोपों पर दोष साबित होने का फैसला।
इस मामले में चंद्रशेखर आजाद पहले भी अदालत में पेश हो चुके हैं। मई 2025 में वह गाजियाबाद की विशेष एमपी-एमएलए अदालत पहुंचे थे। उस समय उन्होंने अपने खिलाफ जारी वारंट को वापस लेने के लिए आवेदन दिया था।
अदालत ने उस आवेदन पर सुनवाई करते हुए आगे की तारीख तय की थी। अब एक बार फिर सुनवाई में अनुपस्थित रहने के बाद उनके खिलाफ गैर-जमानती वारंट जारी किया गया है। <Cite refs={["turn940595search2","turn940595search3"]}/>
गैर-जमानती वारंट जारी होने के बाद पुलिस को अदालत के आदेश के अनुसार आगे की कार्रवाई करनी होती है। वहीं, संपत्ति कुर्क करने की प्रक्रिया कानून में निर्धारित शर्तों और न्यायिक आदेशों के तहत आगे बढ़ती है।
फिलहाल इस मामले में चंद्रशेखर आजाद की ओर से नए आदेश पर कोई प्रतिक्रिया उपलब्ध रिपोर्टों में सामने नहीं आई है। मामले की अगली सुनवाई और अदालत में उनकी पेशी को लेकर आगे की जानकारी का इंतजार है।