अमेरिका और भारत के बीच व्यापार को लेकर टैरिफ का मुद्दा लगातार चर्चा में है। इसी बीच अमेरिका ने कुछ खास तरह की दवाओं और उनके कच्चे माल पर 100 फीसदी टैरिफ से छूट देने का फैसला किया है। इस सूची में भारत समेत कुल 20 देश शामिल हैं। अमेरिका के वाणिज्य विभाग ने 23 सितंबर को इससे जुड़ी गाइडलाइन जारी की है।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अप्रैल 2026 में कुछ पेटेंट वाली फार्मास्युटिकल दवाओं और उनसे जुड़े ingredients पर 100 फीसदी आयात शुल्क लगाने की घोषणा की थी। इसका उद्देश्य अमेरिका में दवाओं के घरेलू उत्पादन को बढ़ावा देना और फार्मास्युटिकल सप्लाई चेन को मजबूत करना बताया गया था।
यह टैरिफ सभी दवाओं पर लागू नहीं है। अमेरिकी नियमों के अनुसार जेनेरिक दवाएं और उनसे जुड़े ingredients फिलहाल इस Section 232 टैरिफ के दायरे से बाहर हैं।
अमेरिका के कॉमर्स विभाग की 23 सितंबर की अधिसूचना में भारत समेत 20 देशों और क्षेत्रों को कुछ विशेष फार्मास्युटिकल उत्पादों के लिए शून्य टैरिफ दर की पात्रता दी गई है।
इन देशों में भारत के अलावा यूरोपीय संघ, जापान, दक्षिण कोरिया, ब्रिटेन, इंडोनेशिया, थाईलैंड, वियतनाम, बांग्लादेश, मलेशिया और अन्य देश शामिल हैं।
हालांकि यह छूट सभी दवाओं पर लागू नहीं होती। इसके लिए दवाओं को अमेरिकी सरकार द्वारा निर्धारित विशेष श्रेणियों में आना होगा या उन्हें अमेरिका की किसी जरूरी स्वास्थ्य जरूरत को पूरा करने वाला माना जाना होगा।
अमेरिकी नियमों में जिन विशेष फार्मास्युटिकल उत्पादों को जीरो टैरिफ की पात्रता दी गई है, उनमें कई महत्वपूर्ण श्रेणियां शामिल हैं।
इनमें रेयर डिजीज के लिए इस्तेमाल होने वाली ऑर्फन ड्रग्स, न्यूक्लियर मेडिसिन, प्लाज्मा आधारित थेरेपी, फर्टिलिटी ड्रग्स, सेल थेरेपी, जीन थेरेपी और एंटीबॉडी ड्रग कॉन्जुगेट्स शामिल हैं।
इसके अलावा केमिकल, बायोलॉजिकल, रेडियोलॉजिकल और न्यूक्लियर खतरों से जुड़े मेडिकल काउंटरमेजर्स तथा पशु स्वास्थ्य से जुड़ी कुछ दवाएं भी इस सूची में शामिल हैं।
अमेरिकी सरकार के अनुसार कुछ पेटेंट वाली दवाओं और उनसे जुड़े फार्मास्युटिकल ingredients पर 100 फीसदी टैरिफ का प्रावधान 29 सितंबर 2026 से अन्य कंपनियों के लिए लागू हुआ है। कुछ कंपनियों पर यह शुल्क इससे पहले 31 जुलाई से लागू किया गया था।
हालांकि जिन उत्पादों को जीरो-टैरिफ वाली विशेष श्रेणी में रखा गया है, वे निर्धारित शर्तों के तहत इस शुल्क से बच सकते हैं।
भारत दुनिया के बड़े जेनेरिक दवा उत्पादकों में शामिल है और भारतीय फार्मा कंपनियों की अमेरिकी बाजार में महत्वपूर्ण मौजूदगी है। ऐसे में अमेरिकी टैरिफ नीति में बदलाव भारतीय दवा कंपनियों के लिए महत्वपूर्ण है।
फिलहाल यह ध्यान रखना जरूरी है कि भारत को सभी फार्मास्युटिकल उत्पादों पर टैरिफ से छूट नहीं मिली है। छूट विशेष श्रेणियों और अमेरिकी नियमों में निर्धारित पात्रता के आधार पर है। वहीं जेनेरिक दवाएं पहले से ही Section 232 के इस टैरिफ से बाहर रखी गई हैं।
अमेरिकी कॉमर्स विभाग ने यह भी बताया है कि अगर कोई फार्मास्युटिकल उत्पाद किसी तत्काल अमेरिकी स्वास्थ्य जरूरत को पूरा करता है, तो संबंधित कंपनियां उसके लिए जीरो टैरिफ की मंजूरी मांग सकती हैं।
इसके लिए कंपनियों को अमेरिकी Bureau of Industry and Security के सामने निर्धारित जानकारी और उत्पाद से जुड़ी जानकारी जमा करनी होगी।
अमेरिका की नई नीति का असर वैश्विक दवा कारोबार पर पड़ सकता है। एक तरफ सरकार घरेलू उत्पादन बढ़ाने के लिए कुछ पेटेंट दवाओं पर भारी टैरिफ लगा रही है, वहीं दूसरी तरफ जरूरी और विशेष श्रेणी की दवाओं को टैरिफ से बाहर रखने की व्यवस्था की गई है।
भारत के लिए विशेष रूप से यह फैसला इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि भारतीय कंपनियां अमेरिकी बाजार में बड़ी मात्रा में दवाओं और फार्मास्युटिकल उत्पादों की सप्लाई करती हैं।