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Ram Govind Chaudhary: अखिलेश यादव ने रामगोविंद चौधरी को दी अंतिम श्रद्धांजलि, बोले- समाजवादी आंदोलन को बड़ी क्षति

लखनऊ में समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता और उत्तर प्रदेश विधानसभा के पूर्व नेता प्रतिपक्ष रामगोविंद चौधरी के निधन के बाद राजनीतिक गलियारों में शोक का माहौल है। शनिवार को सपा प्रमुख अखिलेश यादव निशातगंज स्थित मेट्रो सिटी अपार्टमेंट पहुंचे और रामगोविंद चौधरी के पार्थिव शरीर पर समाजवादी पार्टी का झंडा रखकर उन्हें अंतिम श्रद्धांजलि दी। अखिलेश यादव ने कहा कि चौधरी के निधन से समाजवादी आंदोलन और समाजवादी पार्टी को बड़ी क्षति हुई है।

नम आंखों से दी अंतिम विदाई

अखिलेश यादव रामगोविंद चौधरी के आवास पहुंचे और उनके पार्थिव शरीर के दर्शन कर नमन किया। इस दौरान वह भावुक नजर आए। उन्होंने पार्थिव शरीर पर समाजवादी पार्टी का झंडा रखा और अंतिम श्रद्धांजलि अर्पित की।

अखिलेश यादव ने कहा कि रामगोविंद चौधरी समाजवादी आंदोलन की उस पीढ़ी के नेता थे, जिसने शुरुआती दौर में समाजवाद की पहचान को मजबूत करने के लिए संघर्ष किया। उन्होंने कहा कि चौधरी ने अपना पूरा जीवन समाजवादी आंदोलन के लिए लगा दिया और उनका जीवन संघर्ष से जुड़ा रहा।

अखिलेश बोले- समाजवादी पार्टी को बड़ी क्षति

अखिलेश यादव ने रामगोविंद चौधरी के निधन को पार्टी और समाजवादी आंदोलन के लिए बड़ी क्षति बताया। उन्होंने कहा कि चौधरी प्रभावी ढंग से अपनी बात रखने वाले नेता थे और उनके जाने से पार्टी को एक अनुभवी नेता की कमी महसूस होगी। उन्होंने शोक की इस घड़ी में चौधरी के परिवार के साथ खड़े रहने की बात कही।

74 साल की उम्र में हुआ निधन

रामगोविंद चौधरी का शुक्रवार रात लखनऊ के संजय गांधी पोस्टग्रेजुएट इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज यानी SGPGI में निधन हुआ। वह करीब 74 वर्ष के थे। रिपोर्टों के मुताबिक उनका पिछले कुछ समय से इलाज चल रहा था।

चौधरी के निधन की खबर के बाद समाजवादी पार्टी के नेताओं और कार्यकर्ताओं के बीच शोक की लहर है। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ समेत अलग-अलग दलों के नेताओं ने भी उनके निधन पर संवेदना व्यक्त की है।

आठ बार विधायक रहे रामगोविंद चौधरी

रामगोविंद चौधरी का राजनीतिक सफर छात्र राजनीति से शुरू हुआ था। वह लंबे समय तक समाजवादी आंदोलन से जुड़े रहे। अपने करीब पांच दशक के राजनीतिक जीवन में वह आठ बार विधायक चुने गए।

उन्होंने मुलायम सिंह यादव के नेतृत्व वाली सरकार में मंत्री की जिम्मेदारी संभाली। इसके बाद 2012 से 2017 तक अखिलेश यादव सरकार में भी मंत्री रहे। मार्च 2017 से मार्च 2022 तक उन्होंने उत्तर प्रदेश विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष की जिम्मेदारी संभाली।

बलिया से शुरू हुआ था राजनीतिक सफर

रामगोविंद चौधरी का संबंध बलिया से था और उनकी राजनीति की शुरुआत छात्र आंदोलनों से हुई। आपातकाल के दौरान भी वह लोकतांत्रिक अधिकारों से जुड़े आंदोलनों में सक्रिय रहे और जेल गए। बाद में वह समाजवादी राजनीति में सक्रिय रूप से जुड़े और उत्तर प्रदेश की राजनीति में अपनी पहचान बनाई।

विधानसभा में उनकी भाषण शैली और तर्कों के लिए भी उन्हें जाना जाता था। लंबे राजनीतिक अनुभव के दौरान उन्होंने सदन में कई महत्वपूर्ण मुद्दे उठाए।

अलग-अलग दलों के नेताओं ने जताया दुख

रामगोविंद चौधरी के निधन पर सिर्फ समाजवादी पार्टी ही नहीं, बल्कि दूसरे राजनीतिक दलों के नेताओं ने भी शोक व्यक्त किया है। बलिया की भाजपा विधायक केतकी सिंह ने भी उन्हें श्रद्धांजलि देते हुए कहा कि वैचारिक मतभेदों के बावजूद वह उनके लिए अभिभावक के समान थे। उत्तर प्रदेश सरकार के मंत्री दयाशंकर सिंह भी उनके आवास पहुंचकर श्रद्धांजलि देने वालों में शामिल रहे।

रामगोविंद चौधरी के निधन के बाद समाजवादी पार्टी और उनके समर्थकों के बीच शोक का माहौल है। उनके लंबे राजनीतिक जीवन और समाजवादी आंदोलन से जुड़े योगदान को नेता और कार्यकर्ता याद कर रहे हैं।

 

 

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