उत्तर प्रदेश में कथित आतंकी नेटवर्क के खिलाफ ATS ने बड़ा अभियान चलाया है। पाकिस्तान में मौजूद शहजाद भट्टी से जुड़े नेटवर्क की जांच के तहत प्रदेश के 15 जिलों में छापेमारी की गई। इस कार्रवाई का मकसद संदिग्ध लोगों की पहचान करना और उनके कथित संपर्कों की पड़ताल करना है। सुरक्षा एजेंसियां सोशल मीडिया गतिविधियों से लेकर संदिग्ध लेन-देन तक की जानकारी जुटा रही हैं।
शहजाद भट्टी नेटवर्क से जुड़े संदिग्धों की तलाश में ATS की अलग-अलग टीमें कई जिलों में पहुंचीं। जांच के दौरान उन लोगों पर विशेष नजर रखी जा रही है, जिनके कथित तौर पर नेटवर्क से जुड़े सोशल मीडिया अकाउंट या अन्य संपर्क सामने आए हैं।
एजेंसियां संदिग्धों से पूछताछ कर रही हैं और डिजिटल गतिविधियों की भी जांच की जा रही है। हालांकि, छापेमारी के दौरान कितने लोगों को हिरासत में लिया गया या क्या-क्या बरामद हुआ, इसकी विस्तृत जानकारी की पुष्टि जरूरी है।
जांच एजेंसियों का आरोप है कि शहजाद भट्टी से जुड़ा नेटवर्क सोशल मीडिया के माध्यम से भारतीय युवाओं को अपने संपर्क में लाने की कोशिश करता है। शुरुआत में छोटे काम सौंपकर लोगों को जोड़ने और बाद में उन्हें बड़ी गतिविधियों में शामिल करने की आशंका जताई गई है।
सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार, ऐसे नेटवर्क देश में अशांति फैलाने और आपराधिक गतिविधियों को अंजाम देने के लिए स्थानीय लोगों का इस्तेमाल कर सकते हैं। इसी आशंका के चलते संदिग्ध ऑनलाइन संपर्कों की जांच की जा रही है।
शहजाद भट्टी नेटवर्क को लेकर इससे पहले भी कई राज्यों में अभियान चलाए जा चुके हैं। अगस्त 2026 में सुरक्षा एजेंसियों ने 14 राज्यों में कार्रवाई करते हुए 253 लोगों को हिरासत में लिया था। उस अभियान में उत्तर प्रदेश से 62 लोगों को हिरासत में लिए जाने की जानकारी सामने आई थी।
जांच के दौरान हथियारों, विस्फोटक सामग्री और निगरानी से जुड़े उपकरणों की बरामदगी का भी दावा किया गया था। एजेंसियां इन मामलों के आधार पर नेटवर्क के कथित संपर्कों और गतिविधियों की कड़ियां जोड़ रही हैं।
यूपी ATS की ताजा कार्रवाई के बाद अब जांच का दायरा और बढ़ सकता है। एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि संदिग्धों के बीच किस तरह का संपर्क था और क्या किसी ने नेटवर्क के लिए कोई आपराधिक गतिविधि अंजाम दी है।
फिलहाल जांच जारी है। किसी व्यक्ति का संदिग्ध संपर्क में होना अपने आप में अपराध साबित नहीं करता। आगे की कार्रवाई जांच में सामने आने वाले साक्ष्यों और कानूनी प्रक्रिया के आधार पर होगी।