उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस ने अपने संगठन में बड़ा बदलाव किया है। पार्टी ने आराधना मिश्रा ‘मोना’ को प्रदेश अध्यक्ष और सहारनपुर से सांसद इमरान मसूद को कार्यकारी अध्यक्ष की जिम्मेदारी सौंपी है। इसके साथ ही देवेंद्र निषाद और आलोक प्रसाद को वरिष्ठ उपाध्यक्ष बनाया गया है। इन नियुक्तियों के जरिए कांग्रेस ने प्रदेश में जातीय और सामाजिक समीकरण साधने की कोशिश की है।
कांग्रेस की इस नई रणनीति को ‘BMW’ मॉडल कहा जा रहा है। इसमें B का मतलब ब्राह्मण, M का मतलब मुस्लिम और W का मतलब महिला है। आराधना मिश्रा ब्राह्मण समुदाय से आती हैं और एक महिला नेता भी हैं, जबकि इमरान मसूद मुस्लिम समुदाय का प्रतिनिधित्व करते हैं। इसके अलावा देवेंद्र निषाद ओबीसी समाज से और आलोक प्रसाद दलित समुदाय से आते हैं।
पार्टी की कोशिश है कि इन चेहरों के जरिए अलग-अलग सामाजिक वर्गों तक अपनी पहुंच बढ़ाई जाए। खासतौर पर ऐसे समय में जब प्रदेश में बीजेपी, समाजवादी पार्टी और अन्य दल भी अपने-अपने सामाजिक समीकरण मजबूत करने में जुटे हैं।
आराधना मिश्रा रामपुर खास विधानसभा सीट से लगातार तीन बार विधायक चुनी जा चुकी हैं। वह लंबे समय से कांग्रेस की सक्रिय नेता रही हैं और प्रियंका गांधी के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश में चलाए गए पार्टी अभियानों में भी उनकी अहम भूमिका रही है।
प्रदेश अध्यक्ष के रूप में अब उनके सामने पार्टी संगठन को मजबूत करने, कार्यकर्ताओं को सक्रिय करने और आगामी विधानसभा चुनाव के लिए रणनीति तैयार करने की चुनौती होगी। कांग्रेस को उम्मीद है कि उनके नेतृत्व से ब्राह्मण समुदाय के साथ-साथ महिला मतदाताओं के बीच भी पार्टी की मौजूदगी बढ़ सकती है।
सहारनपुर के सांसद इमरान मसूद को कार्यकारी अध्यक्ष बनाकर कांग्रेस ने पश्चिमी उत्तर प्रदेश में अपनी राजनीतिक पकड़ मजबूत करने का प्रयास किया है। मसूद की क्षेत्रीय राजनीति में सक्रियता और मुस्लिम मतदाताओं के बीच उनकी पहचान पार्टी के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
हालांकि, उनकी नियुक्ति का असर समाजवादी पार्टी के साथ कांग्रेस के रिश्तों पर भी पड़ सकता है। हाल के दिनों में इमरान मसूद और सपा नेतृत्व के बीच बयानबाजी देखने को मिली है। ऐसे में आगामी चुनाव में गठबंधन और सीटों के बंटवारे को लेकर भी यह बदलाव चर्चा का विषय बन सकता है।
कांग्रेस की नई टीम के सामने सबसे बड़ी चुनौती संगठन को जमीनी स्तर पर मजबूत करना है। सामाजिक प्रतिनिधित्व के जरिए संदेश देना एक पहलू है, लेकिन उसे वोटों और चुनावी समर्थन में बदलने के लिए बूथ स्तर पर काम, स्थानीय नेतृत्व और स्पष्ट चुनावी मुद्दों की जरूरत होगी।
वहीं, बीजेपी की ओर से योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में चुनावी तैयारियां जारी हैं। समाजवादी पार्टी भी अपने पीडीए यानी पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक समीकरण पर जोर दे रही है। ऐसे में कांग्रेस के लिए अपनी अलग राजनीतिक पहचान और गठबंधन की रणनीति तय करना भी अहम होगा।
कांग्रेस का नया संगठनात्मक बदलाव उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक नई चर्चा जरूर शुरू करता है। अब देखना होगा कि मिश्रा और मसूद की जोड़ी के साथ पार्टी का BMW फॉर्मूला कितनी दूर तक असर दिखा पाता है और क्या कांग्रेस अपनी नई रणनीति को मजबूत चुनावी संगठन में बदल पाती है।