भारतीय रिजर्व बैंक ने महंगाई के बढ़ते दबाव के बीच बड़ा फैसला लिया है। RBI की मौद्रिक नीति समिति ने रेपो रेट में 25 बेसिस प्वाइंट की बढ़ोतरी की है। इसके साथ ही रेपो रेट 5.25 फीसदी से बढ़कर 5.50 फीसदी हो गया है। यह फरवरी 2023 के बाद RBI की पहली रेपो रेट बढ़ोतरी है।
RBI के इस फैसले के पीछे बढ़ती महंगाई और कच्चे तेल की कीमतों का दबाव प्रमुख वजहों में शामिल है। अगस्त में खुदरा महंगाई 4.82 फीसदी तक पहुंच गई थी, जो RBI के 4 फीसदी के लक्ष्य से लगातार तीसरे महीने ऊपर रही। इसके अलावा वैश्विक परिस्थितियों और रुपये पर बने दबाव को देखते हुए RBI ने अपनी मौद्रिक नीति का रुख भी ‘कैलिब्रेटेड टाइटनिंग’ की तरफ किया है।
रेपो रेट बढ़ने का सीधा असर उन फ्लोटिंग रेट होम लोन पर पड़ सकता है, जिनकी ब्याज दर बाहरी बेंचमार्क या रेपो रेट से जुड़ी है। बैंक ब्याज दर बढ़ाते हैं तो EMI बढ़ सकती है या लोन की अवधि लंबी हो सकती है।
यानी जिन लोगों ने पहले से होम लोन लिया हुआ है या अब नया लोन लेने की तैयारी कर रहे हैं, उन्हें पहले के मुकाबले ज्यादा ब्याज चुकाना पड़ सकता है।
रेपो रेट में बढ़ोतरी का असर सिर्फ होम लोन तक सीमित नहीं रहता। बैंक और वित्तीय संस्थान अपनी लोन दरों में बदलाव कर सकते हैं, जिससे कार लोन और पर्सनल लोन भी महंगे हो सकते हैं। इसका असर नए कर्ज लेने वालों के साथ-साथ उन ग्राहकों पर भी पड़ सकता है जिनकी ब्याज दरें फ्लोटिंग हैं।
जहां कर्ज लेने वालों पर ब्याज दर बढ़ने का दबाव आ सकता है, वहीं सेविंग और फिक्स्ड डिपॉजिट करने वालों के लिए यह फैसला कुछ राहत लेकर आ सकता है। बैंक फंड जुटाने के लिए डिपॉजिट रेट में भी बदलाव कर सकते हैं, हालांकि इसका असर हर बैंक में अलग-अलग हो सकता है।
RBI का यह फैसला ऐसे समय आया है जब अर्थव्यवस्था में ग्रोथ मजबूत बनी हुई है, लेकिन महंगाई और वैश्विक परिस्थितियों को लेकर दबाव बढ़ा है। अब आने वाले समय में बैंक अपनी लोन और डिपॉजिट दरों में क्या बदलाव करते हैं, इसका असर आम लोगों की जेब पर साफ दिखाई दे सकता है।