फ्लाईदुबई की उस फ्लाइट को लेकर जांच में नया अपडेट सामने आया है, जिसमें को-पायलट पर विमान को हाईजैक करने और उसे दुर्घटनाग्रस्त करने की कोशिश का आरोप लगा था। शुरुआती जांच में संकेत मिले हैं कि आरोपी को-पायलट ने इस पूरी घटना को अकेले अंजाम दिया था और फिलहाल किसी आतंकी संगठन या सरकार से उसके सीधे संबंध के सबूत नहीं मिले हैं।
यह घटना दुबई से तेल अवीव जा रही फ्लाईदुबई की फ्लाइट में हुई थी। उड़ान के दौरान को-पायलट ने कथित तौर पर कॉकपिट में कप्तान पर हमला किया और विमान का नियंत्रण अपने हाथ में लेने की कोशिश की।
हमले में भारतीय कप्तान स्मित मच्छर घायल हो गए थे। इसके बावजूद उन्होंने कॉकपिट का दरवाजा खोलने में कामयाबी हासिल की, जिसके बाद यात्रियों और क्रू के कुछ सदस्यों ने मिलकर आरोपी को काबू किया।
हमले के दौरान विमान की ऊंचाई में अचानक भारी गिरावट आई थी। हालात बिगड़ने के बाद विमान को सऊदी अरब के तबुक में इमरजेंसी लैंडिंग करानी पड़ी। विमान में बड़ी संख्या में यात्री सवार थे और घटना के बाद सभी की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई थी।
इस मामले की जांच संयुक्त अरब अमीरात के साथ इजरायल और सऊदी अरब की एजेंसियां भी कर रही हैं। जांचकर्ताओं का मुख्य फोकस आरोपी की मंशा, उसकी पिछली गतिविधियों और यह पता लगाने पर है कि कहीं इस घटना के पीछे कोई और व्यक्ति या संगठन तो शामिल नहीं था।
शुरुआती जानकारी में आरोपी के अकेले काम करने की संभावना जताई गई है, लेकिन जांच अभी जारी है। इसलिए उसके मकसद और किसी संभावित आतंकी कनेक्शन को लेकर अंतिम निष्कर्ष सामने नहीं आया है।
इस घटना के बाद इजरायल जाने वाली उड़ानों के पायलटों की सुरक्षा जांच और वेटिंग प्रक्रिया को लेकर भी सवाल उठे हैं। अधिकारियों ने ऐसे विमानों के क्रू की पहचान और सुरक्षा जांच को और सख्त करने की बात कही है।
फिलहाल जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि आखिर एक प्रशिक्षित को-पायलट ने कॉकपिट में इतना गंभीर कदम क्यों उठाया और क्या उसने वाकई बिना किसी मदद के पूरी घटना को अंजाम दिया।