उत्तर प्रदेश के भदोही जिले को लेकर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बड़ा ऐलान किया है। अब भदोही को ‘संत रविदास नगर भदोही’ के नाम से जाना जाएगा। मुख्यमंत्री ने रविवार को भदोही में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान नाम बदलने की घोषणा की।
भदोही को 30 जून 1994 को वाराणसी से अलग करके नया जिला बनाया गया था। उस समय इसका नाम भदोही ही रखा गया था। इसके बाद अलग-अलग सरकारों के कार्यकाल में जिले का नाम कई बार बदला गया।
1997 में तत्कालीन मुख्यमंत्री मायावती ने भदोही का नाम बदलकर संत रविदास नगर कर दिया था। 1999 में बीजेपी सरकार के दौरान इसका नाम संत रविदास नगर भदोही किया गया।
इसके बाद 2014 में अखिलेश यादव सरकार ने संत रविदास नगर नाम हटाकर फिर से जिले का नाम भदोही कर दिया। अब योगी आदित्यनाथ सरकार ने एक बार फिर संत रविदास के नाम को जिले की पहचान से जोड़ दिया है।
संत रविदास का जन्म वाराणसी के सीर गोवर्धनपुर में माना जाता है। उनके अनुयायियों के बीच उनकी बड़ी धार्मिक और सामाजिक पहचान है। इसी सम्मान में भदोही के नाम के साथ संत रविदास का नाम जोड़ा गया है।
योगी सरकार का यह फैसला ऐसे समय आया है जब उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव नजदीक हैं। नाम बदलने के फैसले को लेकर राजनीतिक प्रतिक्रियाएं भी सामने आ रही हैं। हालांकि, सरकार की ओर से इसे संत रविदास के सम्मान और जिले को नई पहचान देने से जोड़ा गया है।
भदोही अपने कालीन उद्योग के लिए देश-दुनिया में जाना जाता है। मुख्यमंत्री ने जिले में विकास परियोजनाओं और कालीन उद्योग को बढ़ावा देने की बात भी कही है। अब प्रशासनिक स्तर पर नए नाम को लागू करने की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी।