हिंदी और मराठी सिनेमा के दिग्गज अभिनेता नाना पाटेकर का 75 साल की उम्र में निधन हो गया। उनके जाने के बाद उनकी जिंदगी से जुड़े कई किस्से और पुरानी बातें एक बार फिर चर्चा में हैं। इन्हीं में एक ऐसी बातचीत भी शामिल है, जिसमें नाना पाटेकर ने मौत को लेकर अपनी सोच जाहिर की थी। उनकी यह बात आज उनके प्रशंसकों को भावुक कर रही है।
नाना पाटेकर ने एक बातचीत के दौरान अपने दोस्त और पत्रकार को बताया था कि उनके जाने के बाद उनका अंतिम संस्कार उनके फार्महाउस में ही किया जाए। जब दोस्त ने उन्हें ऐसी बातें करने से रोका, तो नाना ने जवाब दिया था कि “मौत ही है, जो हमेशा साथ रहती है। उसे भूलकर फ़ायदा नहीं है।”
उनकी यह बात जिंदगी और मौत को लेकर उनके अलग नजरिए को दिखाती है।
नाना पाटेकर सिर्फ अपने दमदार अभिनय के लिए ही नहीं, बल्कि अपने बेबाक स्वभाव और सादगी के लिए भी पहचाने जाते थे। उनसे जुड़े किस्सों में दोस्तों के साथ उनका अपनापन, नए कलाकारों की मदद और खेती-किसानी के प्रति उनका लगाव अक्सर सामने आता रहा।
वह अपने फार्महाउस पर समय बिताना पसंद करते थे और किसानों की परेशानियों को भी करीब से समझते थे।
नाना पाटेकर ने अपने अभिनय से हिंदी और मराठी सिनेमा में खास मुकाम हासिल किया। ‘परिंदा’, ‘क्रांतिवीर’, ‘प्रहार’ और ‘अब तक छप्पन’ जैसी फिल्मों में उनके अभिनय को खूब सराहा गया। उनके संवाद बोलने का अंदाज और किरदारों को निभाने की शैली उन्हें दूसरे कलाकारों से अलग बनाती थी।
नाना पाटेकर की जिंदगी से जुड़े किस्से बताते हैं कि पर्दे पर सख्त दिखने वाले इस अभिनेता के व्यक्तित्व में दोस्ती, संवेदनशीलता और सादगी के कई रंग थे। उनके निधन के बाद उनकी कही बातें और निभाए गए किरदार उनके प्रशंसकों की यादों में लंबे समय तक बने रहेंगे।